उत्तर प्रदेश संग्रहालय निदेशालय
संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश


राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय, मेरठ (1996)

राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय, मेरठ (1996)

वर्ष 1995 में उ0प्र0 शासन द्वारा राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय का निर्माण का निर्णय लिया गया, तत्क्रम में वर्ष 1997 में टास्कफोर्स द्वारा की गई संस्तुतियों के अनुरूप उ0प्र0 शासन के अधीन उ0प्र0 संग्रहालय निदेशालय द्वारा संचालित राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय, मेरठ की स्थापना हुई। जिसका औपचारिक लोकार्पण 10 मई, 2007 को हुआ।

पश्चिमी उ0 प्र0 स्वतंत्रता आन्दोलन का उद्भव एवं क्रान्ति स्थल रहा है। स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी घटनाओं से सम्बन्धित स्थान मेरठ छावनी, देवबन्द, बरेली, बुलन्दशहर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर एवं बागपत इत्यादि इसके महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में मेरठ का विशिष्ट स्थान है, जहाँ से प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी फूटी। स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी घटनाओं एवं संस्मरणों, जीवन गाथाओं को संरक्षित करना, भावी पीढ़ी को नवीन दिशा प्रदान करना तथा राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय, मेरठ को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट संग्रहालय के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य है। स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी घटनाएं कैसी थीं एवं स्वतंत्रता संग्राम किस प्रकार से लड़ा गया इसका उल्लेख लिखित रूप से तो किताबों एवं अभिलेखों में मिलता है लेकिन दृश्य रूपों में इसका अभाव है, मुख्य रूप से 10 मई 1857 को मेरठ में घटित घटनाएं जो आम जनसामान्य की पहुँच से दूर रही हैं । इन तथ्यों को संग्रहालय में दिखाने का अनूठा प्रयास किया गया है।

जनपदीय संग्रहालय, सुल्तानपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 01 किमी0 एवं बस स्टेशन से 500 मीटर दूरी पर सुल्तानपुर, सुपर मार्केट में स्थित है। गूगल मैप के अनुसार यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया के सामने संग्रहालय स्थित है।
संग्रहालय सुलतानपुर जनपद के अनेक महत्वपूर्ण पुरास्थलों जैसे शनिचरा कुंड भांटी, सोमना भार, कालूपाठक का पुरवॉ, अहिरन पलिया, सोहगौली, महमूदपुर आदि स्थलो पर पुरासांस्कृतिक सम्पदा बिखरी दिखायी देती है। यही नहीं इस जनपद के आस-पास के जनपदों में भी धरती के गर्भ से बराबर अतीत की धरोहर निकलती रहती है। इनके विविध आयामों से सम्बन्धित सामग्रियां और बिखरी सांस्कृतिक पुरा सम्पदा को संकलित, सुरिंक्षत, प्रदर्शित, प्रलेखीकृत व प्रकाशन कर उन पर अध्ययन अनुसंधान करने कराने के बहुउद्देश्य से वर्ष 1988-89 में इस संग्रहालय की स्थापना की गई।