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राजकीय संग्रहालय, मथुरा (1874)

राजकीय संग्रहालय, मथुरा (1874)

राजकीय संग्रहालय, मथुरा की स्थापना भारतीय कला के मनीषी विद्वान पुरातत्ववेत्ता तत्कालीन जिलाधीश श्री एफ0 एस0 ग्राउज द्वारा वर्ष 1874 ई0 में कचहरी के समीप कलात्मक भवन में की गई थी। राजकीय संग्रहालय, मथुरा अपने प्रारम्भ में ‘‘कर्जन म्यूजियम ऑफ आर्कियोलॉजी’’ के नाम से विख्यात रहा। वर्ष 1933 ई0 में संग्रहालय वर्तमान भवन में स्थानान्तरित हुआ। वर्ष 1945 से इसे ‘‘पुरातत्व संग्रहालय’’ तथा वर्ष 1974 से ‘‘राजकीय संग्रहालय, मथुरा’’ के रूप में जाना जाता है।

मूर्ति शिल्प में मथुरा कला शैली का स्थानीय केन्द्र होने तथा प्रारम्भ से ही संग्रहालय का स्वरूप मूलरूप से पुरातात्विक होने के कारण स्पष्टतः संग्रहालय के संकलन में अधिसंख्य कुषाण एवं गुप्तकालीन मथुरा शैली की प्रस्तर कलाकृतियां हैं, परन्तु अन्य वर्गों जैसे मृण्मूर्ति, सिक्के, लघुचित्र, धातुमूर्ति, काष्ठ एवं स्थानीय कला के अनेक दुर्लभ कलारत्न संग्रहीत हैं, जो संस्था के लिए गौरव स्वरूप हैं। मृण्मूर्तियों में शुंगकालीन मातृ देवी, कामदेव फलक, गुप्तकालीन नारी व विदूषक, कार्तिकेय, सॉचे, सिक्कों में बलराम अंकित आहत मुद्राओं के सॉचे, गोविन्द नगर से प्राप्त निधि तथा सौंख से प्राप्त सिक्के एवं कुषाण कालीन धातु मूर्तियों में कार्तिकेय, देव युगल प्रतिमा व नाग मूर्तियां, स्थानीय कला में मन्दिरों की पिछवईयां, सांझी के चित्र आदि संग्रहालय की अत्यन्त मूल्यवान धरोहर हैं।


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