उत्तर प्रदेश संग्रहालय निदेशालय
संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश


लोक कला संग्रहालय लखनऊ (1989)

लोक कला संग्रहालय लखनऊ (1989)

लोक कला हमें विरासत एवं परम्पराओं से प्राप्त होती है, जिनका मूल अति प्राचीन है। जन्म से लेकर मृत्यु तक यह हमारे जीवन में रची बसी होती है जो पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होती रहती हैं किन्तु सामयिक परिवर्तन के कारण आधुनिकीकरण एवं औद्योगिकीकरण की आंधी में हमारे प्रदेश की लोक परम्परायें शनैः शनैः विलुप्त होती जा रही हैं एवं इनका मूल स्वरूप भी परिवर्तित हो रहा है। इन प्राचीन लोक कलाओं एवं परम्पराओं के मूल स्वरूप को अक्षुण्ण बनाये रखने एवं भविष्य के लिए सुरक्षित रखने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग, उ0 प्र0 द्वारा फरवरी, 1989 में लोक कला संग्रहालय की स्थापना कैसरबाग में की गयी थी। वर्तमान में नवनिर्मित लोक कला संग्रहालय भवन, राज्य संग्रहालय परिसर, बनारसीबाग, लखनऊ में स्थापित है।
लोक कलाओं के संकलन, संरक्षण तथा प्रदर्शन की दिशा में कार्यरत् लोक कला संग्रहालय प्रदेश का एक मात्र संग्रहालय है।

संग्रहालय में प्रदेश के विभिन्न अंचलों की उत्कृष्ट एवं दुर्लभ लोक कलाओं से सम्बन्धित लगभग 1800 कलाकृतियों का संग्रह किया गया है, जिसके अन्तर्गत डायोरामा लोक नृत्य, लोक वाद्य, लोक कला आलेखन, आभूषण, पोशाक, टेराकोटा, पारम्परिक मुखौटे, काष्ठ, लौह एवं प्रस्तर के खिलौने बर्तन आदि के उत्कृष्ठ कला प्रदर्श उपलब्ध हैं। संग्रहालय में भूमि एवं भित्ति अलंकरण से सम्बन्धित लोक कला चित्रों का विशाल संग्रह है, जो संरक्षित संकलन के रूप में व्यवस्थित है। उक्त संग्रह के अन्तर्गत धार्मिक अनुष्ठान व तीज त्यौहार विषयक पेन्टिंग, रामलीला से सम्बन्धित मुखौटे, लोकनृत्यों के डायोरामा विभिन्न अंचलों के लोक नृत्यों में प्रयुक्त होने वाले लोकवाद्य, हस्त निर्मित टेराकोटा धातु निर्मित खिलौने तथा लगभग विभिन्न प्रकार के आभूषण और उत्कृष्ट पोशाकों आदि का संग्रह संग्रहालय में विशेष आकर्षण का क्रन्द्र है।


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