उत्तर प्रदेश संग्रहालय निदेशालय
संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश


राजकीय बौद्ध संग्रहालय, कुशीनगर (1995)

राजकीय बौद्ध संग्रहालय, कुशीनगर (1995)

भारत के बौद्ध स्थलों में कुशीनगर (कुशीनारा) का प्रमुख स्थान है। बौद्ध धर्म प्रवर्तक भगवान बुद्ध ने लगभग 80 वर्ष की अवस्था में अपना भ्रमण पूर्ण जीवन व्यतीत करने के पश्चात यहां के शालवन में महापरिनिर्वाण प्राप्त (शरीर त्याग) किया था। कुशीनगर जैसे पवित्र स्थल पर असंख्य पर्यटक एवं बौद्ध धर्मानुयायी प्रति वर्ष भगवान बुद्ध को श्रद्धाजंलि अर्पित करने आते हैं। कुशीनगर की धार्मिक महत्ता एवं समृद्ध ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक धरोहर ने कई देशों एवं विभागों को इस क्षेत्र में अपने धार्मिक एवं सांस्कृतिक संगठन स्थापित करने की प्रेरणा दी। परिणामस्वरूप यह स्थल सम्पूर्ण विश्व में आर्कषण का केन्द्र बन गया। कालान्तर में कुशीनगर की पुरातात्विक सम्पदा सहित भारतीय संस्कृति को संकलित तथा सुरक्षित करने के उद्ेदश्य से संग्रहालय के निर्माण की आवश्यकता प्रतीत हुई। एतदर्थ पूर्वी क्षेत्र में यत्र-तत्र बिखरी कला सम्पदा के संग्रह, संरक्षण, अभिलेखीकरण, प्रदर्शन एवं शोध के साथ ही इस क्षेत्र के गरिमामय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व की जानकारी जन सामान्य को उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग, उ0 प्र0 शासन द्वारा सन् 1993-94 मे राजकीय बौद्ध संग्रहालय की स्थापना की गयी।
संग्रहालय द्वारा संग्रहीत कलाकृतियां जहां एक ओर हमारे समृद्ध कला एवं संस्कृति का आभास कराती हैं, वहीं दूसरी ओर वर्तमान पीढ़ी को उनके गौरवमयी विरासत से परिचित भी कराती हैं।

संग्रहालय का प्रमुख उद्देश्य पूर्वी क्षेत्र एवं देश के अन्य भागों से प्राप्त पुरासम्पदा का संकलन, अभिलेखीकरण, संरक्षण, प्रदर्शन, प्रकाशन तथा देशी-विदेशी पर्यटकों को आकृष्ट कर उन्हें भारतीय संस्कृति के विविध पहलुओं की जानकारी उपलब्ध कराना है। भारतीय इतिहास, कला, संस्कृति और पुरातत्व की जानकारी जन-सामान्य को उपलब्ध कराने के बहुउद्देश्य से संग्रहालय द्वारा शैक्षिक कार्यक्रमों के अन्तर्गत प्रतिष्ठित विद्वानों के व्याख्यान एवं संगोष्ठी के अतिरिक्त विविध प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाता है।


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