उत्तर प्रदेश संग्रहालय निदेशालय
संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश


राजकीय पुरातत्व संग्रहालय, कन्नौज (1996)

राजकीय पुरातत्व संग्रहालय, कन्नौज (1996)

इत्र और इतिहास की नगरी ‘‘कान्यकुब्ज‘‘ वर्तमान जिला कन्नौज ईसा की छठी शती के उत्तरार्द्ध से लेकर बारहवीं शती ई. के अन्त तक उ0 भारत का महत्वपूर्ण अग्रणी नगरों में से एक था। कन्नौज लगभग 600 वर्ष तक उत्तर भारत का केन्द्र बिन्दु था। जहां मौखरी वंश, वर्द्धन वंश, प्रतिहार वंश, गहड़वाल वंश, पुष्पित पल्लवित हुये, नवीं शती ई. में कन्नौज दक्षिण के ‘‘राष्ट्रकूट‘‘ पूर्व के ‘‘पाल‘‘ और उत्तर पश्चिम के ‘प्रतिहार‘ शक्तियों के मध्य त्रिकोणात्मक शक्ति संतुलन का केन्द्र बन गया था। जिस प्रकार मौर्य युग से लेकर गुप्त काल तक पाटलीपुत्र (पटना) का शासक भारत का सार्वभौम चक्रवर्ती सम्राट माना जाता था। उसी प्रकार हर्षोत्तर काल में ‘कान्यकुब्जाधिपति‘ को शक्ति का प्रतीत माना जाता था। कन्नौज संग्रहालय समिति ने 25 फरवरी, 1975 को कन्नौज में संग्रहालय की स्थापना की। कन्नौज संग्रहालय में प्रागैतिहासिक अस्थि उपकरण महाभारत कालीन स्लेटी भूरे चित्रित पात्र, उत्तरी कृष्ण मार्जित मृद्भांड, पाटल मुद्रा, सील, सिक्के, मृण्मूर्ति, हाथी दांत की कलाकृतियां, मनकें, पाषाण प्रतिमायें संग्रहित है, जिसमें विशेष रावणानुग्रह, भैरवरूप में विषपान, तपस्विनी पार्वती, कार्तिकेय, नृत्य गणेश, विष्णु, विश्वरूप विष्णु, हरिहर, सूर्य प्रतिमांए, ब्रहमा, अग्नि, देवी प्रतिमाएं, महिषासुरमर्दिनी दुर्गा, शान्ती रूप दुर्गा, चामुण्डा, सप्तमातृका, नवग्रह, तीर्थकर प्रतिमाएं संग्रहीत है। यह संग्रहालय प्रतिहार काल की कलाकृतियां के लिये विश्वविख्यात है।

कन्नौज संग्रहालय समिति ने 25 फरवरी, 1975 को कन्नौज में एक संग्रहालय की स्थापना की। वर्ष 1995 में संस्कृति विभाग द्वारा इस संग्रहालय को अधिग्रहण करने का निर्णय शासन द्वारा किया गया। 29 फरवरी, 1996 को पुरातत्व संग्रहालय को शासकीय संग्रहालय घोषित करते हुये राजकीय पुरातत्व संग्रहालय का स्वरूप प्रदान किया गया। उक्त संग्रहालय का नवीन भवन बनकर तैयार हो गया है, जिसमें संग्रहालय का संचालन किया जा रहा है।


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