उत्तर प्रदेश संग्रहालय निदेशालय
संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश


राजकीय संग्रहालय, झांसी (1978)

राजकीय संग्रहालय, झांसी (1978)

झांसी उत्तर प्रदेश में बुन्देलखण्ड क्षेत्र का मण्डल मुख्यालय है। यह दिल्ली-मद्रास तथा लखनऊ-भोपाल रेलवे लाइन पर स्थित मध्य रेलवे का जंक्शन स्टेशन है। झांसी सड़क मार्ग से भी आगरा, लखनऊ, खजुराहो, सागर आदि से जुड़ा है।
चारों तरफ चार दीवारी के अन्दर स्थित झांसी नगर को ओरछा नरेश वीरसिंह देव ने बसाया था और यहां की पहाड़ी पर सन् 1613 ई0 में एक किले का निर्माण भी कराया था। सन् 1857 ई0 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का महत्वपूर्णं योगदान रहा है। यद्यपि रानी लक्ष्मीबाई के वीरगति को प्राप्त करने के बाद झांसी पर अंग्रेजों का अधिकार हो गया था, परन्तु उनके अदम्य साहस एवं वीरतापूर्णं योगदान के कारण झांसी भारत में ही नहीं सम्पूर्णं विश्व के इतिहास में अमर हो गयी।

बुन्देलखण्ड में यत्र-तत्र बिखरी पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक सम्पदा को सजाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने सन् 1978 में झांसी में राजकीय संग्रहालय की स्थापना की। इसका शुभारम्भ ग्वालियर रोड स्थित संस्कृत विद्यालय के किराये के भवन से किया गया। वर्तमान में संग्रहालय झांसी दुर्ग के पास अपने नवीन भवन में पूर्णं विकसित रूप में राजकीय संग्रहालय के रूप में स्थित है। पुरातात्विक संग्रह की दृष्टि से बुन्देलखण्ड क्षेत्र के एरच से प्राप्त प्राचीन सिक्के, अभिलिखित ईंट एवं मृण्मूर्तियां तथा सीरौनखुर्द, ललितपुर, महोबा, मैहर इत्यादि स्थानों से प्राप्त मध्यकालीन पाषाण कलाकृतियां प्राप्त हुई हैं। परन्तु सर्वेक्षण, क्रय, पुलिस सहयोग एवं दान से वर्तमान में धातुमूर्तियां, लघुचित्र, पाण्डुलिपि, सिक्के, अस्त्र-शस्त्र, मृण्मूर्तियां, प्रागैतिहासिक मृद्भाण्ड एवं हथियार, लोक कला से सम्बन्धित सामग्री, लोक वाद्य यन्त्र, अमर शहीदों के तैल चित्र, 1857 के दुर्लभ फोटो चित्र, काष्ठ कला के नमूने, डाक टिकट एवं दुर्लभ साहित्य आदि संग्रहीत है। जो अध्ययन एवं शोध की दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं।

वर्तमान में संग्रहालय भवन की दस वीथिकाओं में प्रदर्शन की व्यवस्था की गयी है। भूतल पर स्थित प्रथम वीथिका महारानी लक्ष्मीबाई एवं 1857 के युद्ध को समर्पित है। इस वीथिका को चार भागों में विभक्त किया गया है। प्रथम भाग में महारानी लक्ष्मीबाई के जीवन एवं युद्ध की झलकियों को अट्ठारह डायोरामा के द्वारा प्रस्तुत किया गया है। इन डायोरामा में ध्वनि एवं प्रकाश की व्यवस्था के द्वारा भी महारानी की बाल्यावस्था, किशोरावस्था एवं उनके अन्तिम युद्ध को दर्शकों को प्रत्येक दिवस में प्रातः 11:00 बजे एवं दोपहर 2:00 बजे निःशुल्क दिखाने की व्यवस्था भी की गयी है।


Copyright © 2013 उत्तर प्रदेश संग्रहालय निदेशालय संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश
Design by : उत्तर प्रदेश संग्रहालय निदेशालय संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश