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राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर (1988)

राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर (1988)

पूर्वी क्षेत्र में यत्र-तत्र बिखरी सम्पदा के संग्रह, संरक्षण, अभिलेखीकरण, प्रदर्शन एवं शोध के साथ ही इस क्षेत्र के गरिमामय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व की जानकारी जन सामान्य को उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग, उ0 प्र0 शासन द्वारा सन् 1988 में राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर की स्थापना की गई। पूर्व में यह संग्रहालय किराये के भवन में था। वर्तमान में रामगढ़ताल परियोजना गोरखपुर के अन्तर्गत निर्मित संग्रहालय भवन, गोरखपुर रेलवे एवं बस स्टेशन से लगभग 6 किमी0 दक्षिण एवं सर्किट हाउस से लगभग 1 कि0मी0 दक्षिण-पूर्व में स्थित है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश बौद्ध धर्म के उद्भव और विकास का हृदय स्थल रहा है। भगवान बुद्ध के जीवन की घटनाओं से सम्बन्धित स्थान लुम्बिनी, देवदह, कोलियों का रामग्राम, कोपिया एवं तथागत की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर इसके महत्वूपर्ण साक्ष्य हैं। जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर महावीर की परिनिर्वाण स्थली पावानगर भी इसी क्षेत्र में विद्यमान है। आमी नदी के तट पर स्थित संत शिरोमणि कबीरदास की निर्वाण स्थली मगहर और नाथ पंथ के गोरखनाथ की तपोभूमि भी यहां के इतिहास के कलेवर को उद्घाटित करता है।



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